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Bhagalpur Baba Dharmanand Case: दुष्कर्म मामले में बाबा धर्मानंद को 20 साल की सजा, पीड़िता को 3 लाख रुपये मुआवजा

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भागलपुर पॉक्सो कोर्ट ने नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म मामले में आरोपी बाबा धर्मानंद को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने पीड़िता को तीन लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया।

भागलपुर/आलम की खबर:भागलपुर जिले में नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के मामले में पॉक्सो की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी बाबा धर्मानंद को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर आरोपी को एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। अदालत के इस फैसले के साथ ही पीड़िता को राहत देते हुए तीन लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश जारी किया गया है। मामले की सुनवाई के दौरान पेश किए गए गवाहों और सबूतों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी पाया और सजा का ऐलान किया।

यह मामला भागलपुर जिले के मधुसूदनपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां मई 2024 में एक नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। पुलिस जांच में सामने आया था कि बच्ची खेलने के दौरान आरोपी बाबा धर्मानंद के आश्रम पहुंची थी। आरोप है कि इसी दौरान आरोपी ने बच्ची के साथ गलत हरकत की। घटना की जानकारी जब आसपास के लोगों को मिली तो इलाके में भारी आक्रोश फैल गया और लोगों ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग शुरू कर दी।

घटना के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की थी। पुलिस कार्रवाई के दौरान आरोपी बाबा धर्मानंद को गिरफ्तार किया गया था। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया, जिसके आधार पर मामले की सुनवाई पॉक्सो की विशेष अदालत में चली। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कई महत्वपूर्ण तथ्य और गवाह पेश किए गए, जिसके बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया।

अदालत में सरकार की ओर से मामले की पैरवी पॉक्सो के विशेष लोक अभियोजक शंकर जय किशन मंडल ने की। उन्होंने बताया कि अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को कठोर सजा सुनाई है। साथ ही पीड़िता के पुनर्वास और सहायता के लिए तीन लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया गया है।

आरोपी बाबा धर्मानंद जगदीशपुर थाना क्षेत्र के वादे गांव का रहने वाला बताया गया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ मधुसूदनपुर थाना क्षेत्र में मामला दर्ज किया गया था। घटना सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में काफी नाराजगी थी और लोग आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे थे। पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया और मामले को न्यायालय तक पहुंचाया।

कोर्ट के फैसले के बाद पीड़िता पक्ष को न्याय की उम्मीद जगी है। पॉक्सो कानून के तहत बच्चों के साथ होने वाले अपराधों में दोष साबित होने पर कड़ी सजा का प्रावधान है। न्यायालय ने इसी प्रावधान के तहत आरोपी को कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

इसी बीच भागलपुर के मधुसूदनपुर इलाके में एक अन्य मामला भी सामने आया है, जिसमें एक महिला ने ससुराल पक्ष के लोगों पर मारपीट करने और गवाही देने से रोकने का आरोप लगाया है। महिला रंजू देवी का कहना है कि पति की मौत के बाद से ही ससुराल पक्ष के लोग उसे परेशान कर रहे थे। महिला ने पहले भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।

महिला के अनुसार सोमवार को इसी मामले में उसकी गवाही होनी थी। आरोप है कि गवाही से रोकने के उद्देश्य से कुछ लोग उसके घर पहुंचे और उसके साथ मारपीट की। महिला ने आरोप लगाया कि लोहे की रॉड से हमला किए जाने के कारण वह गंभीर रूप से घायल हो गई और बेहोश हो गई। बच्चों के शोर मचाने के बाद आसपास के लोगों ने पहुंचकर उसकी मदद की और उसे इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया।

पुलिस ने महिला के आरोपों के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

भागलपुर में सामने आए इन मामलों के बाद एक बार फिर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। वहीं, न्यायालय के फैसले से यह संदेश गया है कि बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों पर कानून सख्त कार्रवाई करता है।

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बच्चों से जुड़े अपराध समाज के लिए बेहद गंभीर विषय हैं। ऐसे मामलों में त्वरित जांच और न्यायिक कार्रवाई पीड़ित परिवार को भरोसा देती है। बाबा धर्मानंद मामले में अदालत का फैसला यह दिखाता है कि दोष साबित होने पर कानून के तहत सख्त सजा दी जा सकती है।

समाज में बच्चों की सुरक्षा के लिए जागरूकता जरूरी है। साथ ही ऐसे मामलों में पीड़ितों को समय पर सहायता और न्याय मिलना भी महत्वपूर्ण है।

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